
अपने बहनोई डॉ. यशवंत बर्त्वाल को शिक्षक से कृषि विभाग में सहायक निदेशक का ओहदा दिलाकर उत्तराखंड के कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने इस बात को साबित कर दिया है कि नियम-कानून सिर्फ आम आदमी के लिए होते हैं।
नियम कायदे ताक पर
मास्साब को ‘लाटसाहब’ बनाने के लिए मंत्री ने सभी नियम कायदों को ताक पर रख दिया। शासन इस नियुक्ति को नियम विरुद्ध करार दे चुका था, लेकिन मंत्री नहीं माने। न्यूनतम योग्यता पूरी न करने के बावजूद उन्होंने बर्त्वाल को यह पद सौंप दिया।
इस बात का खुलासा खुद कृषि विभाग ने सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में किया है। कृषि मंत्री हरक सिंह रावत के निर्देश पर कृषि निदेशक सीएस मेहरा ने प्रवक्ता डॉ. यशवंत बर्त्वाल की सांख्यिकी शाखा में प्रतिनियुक्ति के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था।
नहीं ली शिक्षा विभाग से एनओसी
प्रस्ताव में उन्होंने बताया था कि शाखा में उप कृषि निदेशक सांख्यिकी श्रेणी-1 के दो पद और सहायक निदेशक सांख्यिकी श्रेणी-2 के तीन पद रिक्त हैं। लेकिन, तमाम झोल होने के कारण शासन में यह फाइल अटक गई।
मनमानी इस स्तर तक थी कि इस प्रतिनियुक्ति के लिए न तो शिक्षा विभाग से एनओसी ली गई और न ही विज्ञप्ति जारी की गई। शासन ने एक नवंबर यह फाइल लौटाते हुए जो टिप्पणी की वह बेहद गंभीर है। शासन ने ताज्जुब जताया कि आखिर यह प्रस्ताव किस आधार पर भेजा गया, यह स्पष्ट नहीं है।
इसलिए गलत है प्रतिनियुक्ति
शासन ने प्रतिनियुक्ति के प्रस्ताव पर स्पष्ट किया कि प्रतिनियुक्ति समान ग्रेड पे के पद पर ही हो सकती है। जबकि, उप निदेशक और सहायक निदेशक का ग्रेड पे प्रवक्ता डॉ. यशवंत बर्त्वाल के वर्ममान ग्रेड पे से ज्यादा है।
जबकि सहायक निदेशक सांख्यिकी श्रेणी-2 पद पर आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती होनी चाहिए, प्रतिनियुक्ति से नहीं। इस पद के लिए अर्हता एमएससी गणित, सांख्यिकी, गणितीय सांख्यिकी एवं कृषि सांख्यिकी है। जबकि, डॉ. यशवंत बर्त्वाल एमएससी भौतिक हैं।
संयुक्त निदेशक कृषि देवेंद्र पालीवाल ने इस फाइल में यह स्पष्ट कर दिया था कि डॉ. यशवंत बर्त्वाल को प्रतिनियुक्ति पर नहीं लिया जा सकता।
